अबनाः राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि ईरान की जनता को अमरीका पर विश्वास नहीं है और अमरीका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण अविश्वास का वातावरण और भी गहरा होगा अतः हम अमरीका की ओर से ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों को जेनेवा समझौते के विपरीत मानते हैं।
राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने शनिवार को एक प्रेस कान्फ़्रेन्स में ईरानी और विदेशी पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे।
डाक्टर रूहानी ने विभिन्न टीवी चैनलों और रेडयो प्रसारणों से प्रत्यक्ष रूप से प्रसारित होने वाले संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष के दावे करने वाले देशों को चाहिए कि अपने दावे में गंभीर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने इससे पहले संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में कहा था कि हिंसा और चरमपंथ के विरुद्ध सभी देश एकजुट हो जाएं। डाक्टर रूहानी ने कहा कि आतंकवाद से संघर्ष का तरीक़ा यह है कि इसका दावा करने वाले देश अपने दावे में सच्चे साबित हों। राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि सीरिया या इराक़ में आतंकी संगठनों के हाथों अमरीकी या कोई और नागरिक मारा जाता है तो इसमे कोई अंतर नहीं होना चाहिए यह एक अंतर्राष्ट्रीय संकट है, हम अपने क्षेत्र में इस संकट से लड़ रहे हैं और अन्य देशों के सहयोग का स्वागत करते हैं।
डाक्टर रूहानी ने अमरीका की ओर से ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों के बारे में कहा कि हम गर्व से कहते हैं कि इन प्रतिबंधों को विफल बनाने और चकमा देने के लिए हम क़दम उठा रहे हैं क्योंकि इन प्रतिबंधों को ग़ैर क़ानूनी तथा कुछ प्रतिबंधों को तो अमानवीय मानते हैं।
राष्ट्रपति रूहानी ने प्रतिबंधों से परमाणु वार्ता पर कोई प्रभाव पड़ने की संभावना के बारे में कहा कि छह विश्व शक्तियों में जिनसे ईरान की परमाणु वार्ता हो रही है जिस देश की सदभावना और सत्यता पर सबसे अधिक संदेह है वह अमरीका है, अन्य देशों ने अब तक कोई भी एसा क़दम नहीं उठाया है जिसे हमें यह लगे कि वह वार्ता को सफल नहीं होने देना चाहते। डाक्टर रूहानी ने कहा कि हम परिणाम तक पहुंच जाने तक वार्ता जारी रखेंगे और आशा करते हैं कि दूसरे पक्ष भी सदभावना का प्रदर्शन करेंगे।
डाक्टर रूहानी ने सऊदी अरब से द्विपक्षीय संबंधों के बारे में कहा कि सऊदी अरब सहित सभी देशों से अच्छे संबंध रखना ईरान के एजेंडे में शामिल है, ईरान और सऊदी अरब के बीच मतभेद दोतरफ़ा संबंधों के बारे में नहीं है, किंतु कुछ मतभेद पाए जाते हैं जो आगे भी उत्पन्न हो सकते हैं अलबत्ता इन्हें हल करने का एक मात्र मार्ग वार्ता है और हम वार्ता के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अब इस्राईल और आतंकवादी संगठनों की पराजय के कारण परिस्थितियां बदल गई हैं और हम सऊदी अरब से बातचीत के लिए तैयार हैं।
डाक्टर रूहानी ने आतंकवाद से संघर्ष के संबंध ईरान की नीति का विशलेषण करते हुए कहा कि जो देश भी आतंकवाद से लड़ना चाहे हम उसकी सहायता करेंगे चाहे वह इराक़ हो, सीरिया हो, लेबनान हो या फ़िलिस्तीन की महान जनता। डाक्टर रूहानी नेक हा कि अमरीकियों के पास आतंकवाद से संघर्ष की वास्तविक इच्छा नहीं है।
डाक्टर रूहानी ने कहा कि आतंकी संगठन तीन साल से सीरिया में और इसी प्रकार इराक़ में लोगों की हत्याएं कर रहे हैं किंतु अमरीका ने चुप्पी साध रखी थी और जब वह आतंकियों से लड़ाई के लिए तैयार हुआ है तो उसका कहना है कि अपने दूतावास और काउंस्लेटों की रक्षा करेगा, इसे आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई नहीं कहा जा सकता।
30 अगस्त 2014 - 19:14
समाचार कोड: 634575
राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि ईरान की जनता को अमरीका पर विश्वास नहीं है और अमरीका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण अविश्वास का वातावरण और भी गहरा होगा अतः हम अमरीका की ओर से ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों को जेनेवा समझौते के विपरीत मानते हैं।